
पुणे (महाराष्ट्र) कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लोकप्रिय भोजपुरी गायिका नेहा सिंह राठौर से बातचीत करते हुए शनिवार को कहा कि सरकार को नापसंद मुद्दों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें वर्षों से दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह सुधर नहीं रहे हैं। नेहा सिंह राठौर सरकार की आलोचना, देश के मुद्दों पर सवाल करने और अपने व्यंग्यात्मक गीतों के लिए जानी जाती हैं। नेहा ने कहा कि वह महिलाओं के साथ होने वाले अनादर के बारे में बात करने आई हैं और सवाल किया कि अगर महिलाएं सत्ता में बैठे लोगों से सवाल नहीं कर सकतीं, तो उन्हें किस तरह का सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा, मैं सरकार को नापसंद आने वाले सभी मुद्दों पर सवाल उठाती हूं। इसके बदले मुझे काफी गालियां और प्राथमिकी झेलनी पड़ती हैं। महिलाओं के प्रति यह कैसा सम्मान है? अगर लोकतंत्र में हम अपने प्रधानमंत्री से सवाल नहीं कर सकते, तो यह कैसा सम्मान होगा? नेहा ने शादी के बाद उत्तर प्रदेश में एक व्यंग्यात्मक गीत गाने की घटना को याद करते हुए कहा कि पुलिस की टीम उनके पीछे भेजी गई थी और इलाके के लोगों ने उनके परिवार से सवाल किया था कि वह किस तरह की महिला हैं।
नेहा ने कहा, एक महिला के तौर पर अगर आप समाज के कुछ मुद्दों पर बोलना चाहती हैं, तो यह बहुत मुश्किल होता है। पुरुषों को भी निशाना बनाया जाता है, लेकिन महिलाओं को बहुत अलग तरह से निशाना बनाया जाता है। लोग सीधे उनके चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं। नेहा राठौर ने कहा कि वह थोड़ी निडर और जिद्दी हैं और आलोचना से डरती नहीं हैं। उन्होंने कहा, वे मुझसे कहते हैं कि वे पिछले पांच साल से मुझे गालियां दे रहे हैं, लेकिन फिर भी मैं सुधरी नहीं हूं। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि मैं सुधरने वाली नहीं हूं।
नेहा सिंह राठौर की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने कहा कि उन्हें भी वर्षों से गालियां दी जा रही हैं, लेकिन इससे वह विचलित नहीं होंगे। गांधी ने कहा कि सरकार को नापसंद मुद्दों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें वर्षों से दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने जोर दिया वह सुधरने वाले नहीं हैं। राहुल ने राठौर की बात दोहराते हुए कहा, मुझे भी वर्षों से गालियां दी जा रही हैं, लेकिन मैं भी सुधरने वाला नहीं हूं। उन्होंने कहा, मैं भी नहीं सुधर रहा हूं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ शनिवार को संवाद के दौरान छात्राओं ने बताया कि यौन उत्पीड़न, व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर चिंता, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की कमी और आर्थिक परेशानियां अब भी महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता में बाधा बनी हुई हैं।
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में पालघर के वसई की अर्थशास्त्र की छात्रा सुचित्रा पागी ने 13 साल की उम्र में स्कूल से घर लौटते समय और बाद में सार्वजनिक परिवहन से यात्रा के दौरान छेड़खानी की घटनाओं को याद किया। पागी ने कहा कि इन अनुभवों से उनके मन में पुरुषों को लेकर डर पैदा हो गया, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी पुरुष एक जैसे नहीं होते। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब वे किसी महिला को परेशान होते देखें तो उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए। पुणे में मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रहीं मैत्री ने कहा कि सुरक्षा को लेकर चिंताएं शिक्षा में बाधा बन सकती हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए। उन्होंने कहा कि गांवों में माता-पिता अक्सर सुरक्षा कारणों से अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजने में हिचकिचाते हैं और इसके बजाय बेटों को पढ़ाना पसंद कर सकते हैं। साइबर और डिजिटल साइंस की बीएससी की दूसरे वर्ष की छात्रा प्रज्ञा गावंडे ने साइबर सुरक्षा जैसे विशेष पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने में आने वाली आर्थिक बाधाओं को रेखांकित किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है और 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं। महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने लिए आवाज उठानी चाहिए और खुद पर विश्वास रखना चाहिए। कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप -शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित कर हिंसा और आर्थिक हिंसा गिनाए। गांधी ने कहा कि हर साल 4.5 लाख कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं, 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं, 29 प्रतिशत को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है और छह प्रतिशत महिलाएं दुष्कर्म का सामना करती हैं। उन्होंने दावा किया कि सामाजिक कलंक के डर से यौन हिंसा की 99 प्रतिशत घटनाओं की शिकायत दर्ज नहीं होती।
नेता प्रतिपक्ष राहुल ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर 50 प्रतिशत महिलाओं को शिक्षा या रोजगार के अवसरों से वंचित कर दिया जाता है। महिलाओं को सुरक्षित यात्रा के नाम पर हर साल अतिरिक्त 17,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि महिलाओं को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि 60 प्रतिशत महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं। उन्होंने कहा, लड़के को किसी भी समय बाहर जाने और देर से घर आने की इजाजत होती है, लेकिन लड़कियों को रात आठ बजे तक घर लौटना पड़ता है। लड़के किसी भी परीक्षा में कई बार बैठ सकते हैं, लेकिन लड़कियों को केवल एक मौका मिलता है। उनसे कहा जाता है कि यह उनकी शादी का समय है और परीक्षा देने जाने की जरूरत नहीं है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि 45 प्रतिशत महिलाओं को शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई या काम छोड़ना पड़ता है, जबकि केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के नाम जमीन है। घरों में असमानता को रेखांकित करते हुए गांधी ने कहा कि 15 से 29 वर्ष की आयु की महिलाएं घर में 5.5 घंटे काम करती हैं, जबकि उसी घर में लड़के केवल 30 मिनट काम करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 84 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार करने के लिए अपने परिवार की अनुमति लेनी पड़ती है। गांधी के अनुसार, महिलाएं पुरुषों की तुलना में 25 प्रतिशत कम कमाती हैं और उन्हें आसानी से पदोन्नति नहीं मिलती।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ शामिल होने की पेशकश की। समुदाय की एक छात्रा द्वारा छात्रावास सुविधाओं, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए जाने के बाद गांधी ने उन्हें समर्थन दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुणे में पार्टी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया। छात्रा द्वारा आदिवासी छात्रों की समस्याएं उठाए जाने पर गांधी ने कहा, मुझे वहां बुलाओ, मैं आकर आपके साथ बैठूंगा।
यहां छात्राओं ने शिक्षा तक पहुंच, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और साइबर उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी से संवाद किया। आदिवासी समुदाय की छात्रा ने गांधी को बताया कि आदिवासी छात्र अपनी मांगों को लेकर पुणे के मंजरी इलाके में पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उसने कहा कि दो छात्राएं भी इस प्रदर्शन में शामिल हैं और उनमें से एक की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छात्रा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि यह मामला मुख्यमंत्री के स्तर का है। अधिकारियों की आलोचना करते हुए छात्रा ने कहा, अगर आप आदिवासी छात्रों के विकास के लिए काम नहीं कर सकते, तो आपको उस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।
छात्रा ने सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने के लिए निर्धारित आयु सीमा बढ़ाने की मांग की। उसने कहा कि वर्तमान में छात्रों को छात्रावास में रहने की अवधि को लेकर पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। उसने इसे बढ़ाकर 35 वर्ष करने की मांग की और कहा कि आदर्श रूप से ऐसी कोई आयु सीमा नहीं होनी चाहिए। उसने आदिवासी आश्रम विद्यालयों की स्थिति पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि कई संस्थानों में बिस्तर और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। छात्रा ने आश्रम विद्यालयों में केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था की भी आलोचना की, जिसमें एक स्थान पर भोजन तैयार कर उसे लंबी दूरी तक पहुंचाया जाता है। उसने कहा कि इससे भोजन खराब होने और छात्रों के बीमार पड़ने का खतरा रहता है।
गड़चिरोली की हालिया घटना का जिक्र करते हुए छात्रा ने कहा कि सोते समय सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी और तीन अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसने प्रत्येक मृत छात्रा के परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। आदिवासी शिक्षण संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की मांग करते हुए छात्रा ने सवाल किया कि आश्रम विद्यालयों और अन्य आवासीय शिक्षण संस्थानों में चौबीसों घंटे एक नर्स की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रावास से एक महीने से अधिक समय तक दूर रहने के बाद आदिवासी छात्राओं से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं और दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत गर्भावस्था जांच भी कराई जाती है। उसने इस व्यवस्था की जरूरत पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। छात्रा द्वारा मंजरी में जारी अनशन का जिक्र किए जाने पर राहुल गांधी ने कहा, मुझे वहां बुलाओ, मैं आकर आपके साथ बैठूंगा। कांग्रेस नेता ने यह भी संकेत दिया कि वह छात्रों के साथ शामिल होकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाएंगे।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि महिलाओं का अपनी अस्तित्व है और उनकी पहचान को उनके पिता, पति या बेटों के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति के उस नियम को शर्मनाक बताया, जिसके अनुसार महिला को जीवन के हर चरण में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना चाहिए। कांग्रेस के युवा संपर्क कार्यक्रम छात्रों की गूंज को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलाओं की अनोखी यात्राएं, अनोखी कल्पनाएं और अनोखे सपने हैं। राहुल गांधी ने कहा, मैं यहां मनुस्मृति का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें साफ कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन रहना चाहिए, जवानी में वह अपने पति के अधीन होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। ये शब्द शर्मनाक हैं। ये शब्द नहीं कहे जाने चाहिए।
राहुल ने कहा कि महिलाएं देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें अपने लिए खड़ा होना चाहिए और खुद पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा, आप खुद के अलावा किसी और के अधीन नहीं हैं। पिता, भाई, पति या बेटे के साथ आपका रिश्ता तो है, लेकिन आप उनके अधीन नहीं हैं, आपकी अपनी खुद की पहचान है।
कॉलेज के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवतियां मौजूद थीं। इसमें राहुल गांधी ने कहा कि वह यहां भाषण देने या राजनीति पर चर्चा करने नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी भावनाएं व्यक्त करने और अपने विचारों पर चर्चा करने का मौका देने आए हैं। दर्शकों से पिंजरा तोड़ने का आह्वान करते हुए गांधी ने युवाओं से कहा कि हर व्यक्ति अनोखा होता है और उसके अपने सपने और दृष्टिकोण होता है। कांग्रेस नेता ने मौजूद युवतियों को संबोधित करते हुए कहा, आप अनोखे हैं, आप खास हैं, आप एक व्यक्ति हैं और आपके अपने सपने हैं। मेरा तर्क यह है कि महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील, अधिक सौम्य, अधिक दयालु और अधिक दूरदर्शी होती हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं को अक्सर तीन पहचानों -बेटी, पत्नी या मां- तक ही सीमित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि इन रिश्तों में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन ये उनकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं। गांधी ने कहा कि महिलाएं पेशेवर और खिलाड़ी बनती हैं तथा कई क्षेत्रों में सक्रिय रहती हैं, लेकिन अक्सर पुरुषों के साथ उनके रिश्तों के जरिये ही उनकी पहचान तय की जाती है।
शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि भाजपा घबराई हुई है और इसी वजह से प्रशासन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुणे में आयोजित छात्रों की गूंजश् कार्यक्रम को अनुमति देने से पहले कई शर्तें लगायीं। राज्यसभा सदस्य राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि निकट भविष्य में भाजपा का पतन देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक के पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की राहुल गांधी की मांग के आगे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के छह घंटे से अधिक समय तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल हुए युवक साहिल लोचब के मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
राउत ने शनिवार शाम पुणे में आयोजित गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने अनुमति देने के लिए 30 शर्तें रखीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी किसी दूसरे देश से आए हैं और क्या सत्तारूढ़ दलों के नेताओं को भी ऐसी शर्तों का सामना करना पड़ता है। शिवसेना (उबाठा) नेता राउत ने कहा, ऐसा इसलिए है, क्योंकि भाजपा घबराई हुई है। सितंबर के बाद भाजपा का पतन शुरू हो जाएगा। वे राहुल गांधी से डरे हुए हैं। शिवसेना (उबाठा) नेता और मुंबई की पूर्व महापौर विशाखा राउत के जाति प्रमाणपत्र को अधिकारियों द्वारा अमान्य किए जाने के बारे में राउत ने आरोप लगाया कि यह बदला लेने के लिए किया गया और केवल विपक्षी नेताओं को ही इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
Chhatron Ki Goonj event in Pune—featuring discussions on Rahul Gandhi, Neha Rathore, the Manusmriti, women’s rights, and the voices of numerous young women—has garnered worldwide attention

