नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों को नैतिकता, संविधान, इंसानियत इत्यादि से कोई मतलब नहीं है, ऐसा हर रोज परिलक्षित होता है। विधानसभा चुनाव को लेकर वे जमकर मनमानी कर रहे हैं और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना हुआ है। पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों समेत 700 से अधिक नागरिकों ने निर्वाचन आयोग सीईसी को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन को आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन बताया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित शिकायत में हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित यह संबोधन आचार संहिता लागू रहने के दौरान चुनाव प्रचार के समान था। उनका कहना है कि सरकारी संसाधनों का इस तरह उपयोग सत्तारूढ़ दल को अनुचित लाभ पहुंचाता है और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
वर्तमान में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के चलते आचार संहिता लागू है। इनमें से कुछ राज्यों में मतदान हो चुका है, जबकि कुछ में मतदान होना बाकी है। मतगणना चार मई को निर्धारित है।
शिकायतकर्ताओं ने आयोग के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों को आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से जोड़ने या सरकारी तंत्र का उपयोग पक्षपातपूर्ण उद्देश्यों के लिए करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने आयोग से इस मामले की जांच करने, संबोधन की विषयवस्तु और प्रसारण के तौर-तरीकों की समीक्षा करने तथा उचित कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि इस संबोधन के प्रसारण के लिए पूर्व अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी सार्वजनिक प्रसारकों पर समान समय दिया जाना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित हो सके। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति राजनीतिक अर्थशास्त्री परकाला प्रभाकर, राजनीििक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार-लेखक टी एम कृष्णा, पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता, शिक्षाविद जोया हसन और पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी, पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी, अमिताभ पांडे और ए. शुक्ला, पत्रकार जॉन दयाल और विद्या सुब्रमण्यम और भाकपा नेता एनी राजा के सहित कई शिक्षाविद, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि आयोग को चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने के लिए शीघ्रता से कार्रवाई करनी चाहिए।
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