16 अक्टूबर 2023 को हेलसिंकी, फिनलैंड में फिनलैंड के राजनेता, राजनयिक, फिनलैंड के राष्ट्रपति रहे मार्टी अहतिसारी (मार्टी ओइवा कालेवी अहतिसारी, जन्म 23 जून 1937) का निधन हुआ। मार्टी अहतिसारी तंजानिया में फिनलैंड के राजदूत नामीबिया के लिए संयुक्त राष्ट्र आयुक्त रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मार्टी अहतिसारी को 2008 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। अहतिसारी को संयुक्त राष्ट्र ने ग्रहयुद्ध ग्रस्त कोसोवो की स्थिति से जुड़ी बातचीत की प्रक्रिया आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन वार्ताओं का उद्देश्य कोसोवो में लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाना था, बाद में 2008 में कोसोवो ने सर्बिया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। अक्टूबर 2008 में कई महाद्वीपों पर और तीन दशकों से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने के मार्टी अहतिसारी के महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। नोबेल समिति के बयान में कहा गया कि #MarttiAhtisaari ने नामीबिया, आचेह (इंडोनेशिया), कोसोवो, सर्बिया और इराक सहित कई गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। अहतिसारी ने एक सरल दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने मध्यस्थ की बहुआयामी भूमिका की तुलना जहाज के पायलट, डॉक्टर, दाई और शिक्षक से की।
यहां प्रस्तुत हैं मार्टी अहतिसारी के चुनिंदा कथन
सभी संघर्षों को सुलझाया जा सकता है। युद्ध और संघर्ष अनिवार्य नहीं हैं। ये इंसानों द्वारा ही पैदा किए जाते हैं। हमेशा कुछ ऐसे हित होते हैं जिन्हें युद्ध के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इसलिए, जिनके पास सत्ता और प्रभाव है, वे इन्हें रोक भी सकते हैं। शांति कायम करना इच्छाशक्ति का सवाल है।
युद्ध के समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए, हमें सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि शांति के समय उन्हें समान अधिकार मिलें।
अभी बहुत कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।
मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह शर्म की बात है कि हमने इतने सारे संघर्षों को स्थिर (बिना सुलझे) रहने दिया है, और हम उन्हें हल करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रहे हैं।
प्रगति की शुरुआत अभी से होनी चाहिए।
आपको अपने क्लाइंट्स के साथ काफी स्पष्ट और सीधा होना पड़ता है। आप संबंधित पक्षों से केवल अच्छी-अच्छी बातें ही नहीं कह सकते। यह कोई मनोरंजन शो नहीं है और न ही यह कोई रियलिटी टेलीविजन है।
कुछ मानक हैं, जैसे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके जीवन में सुधार लाना, इन पर अभी काम करने और सुधार करने की जरूरत है। सही ढंग से काम कर पाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको फंड की जरूरत होती है और वह कभी भी पर्याप्त नहीं होता।
इस क्षेत्र के देशों की आपस में सहयोग करने और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की क्षमता, यूरोपीय संघ के साथ पूरी तरह से जुड़ने की उनकी संभावनाओं को परखने के लिए एक अहम पैमाना होगी।
शांति का अर्थ केवल युद्ध का न होना नहीं है। यह मन की एक अवस्था है, जिसमें परोपकार, आत्मविश्वास और न्याय की भावना होती है।
शांति के लिए हमें समझौता करने और मिलकर काम करने को तैयार रहना चाहिए। बिना समझौते के कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
बातचीत ही विवादों को सुलझाने की कुंजी है। इससे एक-दूसरे को समझने और आपसी सहमति के बिंदु खोजने में मदद मिलती है।
कूटनीति कमजोरी की निशानी नहीं है, बल्कि यह ताकत का प्रमाण और शांति के प्रति प्रतिबद्धता है।
शांति स्थापना के लिए धैर्य, लगन और सबसे बढ़कर, दूसरों के कष्टों के प्रति सहानुभूति की आवश्यकता होती है।
स्थायी शांति कायम करने के लिए, हमें विवादों की जड़ तक जाना होगा, जिसमें असमानता और अन्याय जैसे कारण शामिल हैं।
शांति का अर्थ जीतना या हारना नहीं है, बल्कि एक ऐसा संतुलन खोजना है जिससे सभी को लाभ हो।
हमें अपनी पिछली गलतियों से सीखना चाहिए और उन्हें सबक के रूप में इस्तेमाल करके एक बेहतर भविष्य का निर्माण करना चाहिए।
शांति स्थापना के लिए हमें अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना होगा और उन लोगों के साथ जुड़ना होगा, जिनके विचार हमसे अलग हैं।
शांति कोई मंजिल नहीं है यह एक ऐसी यात्रा है जिसके लिए निरंतर प्रयास और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। -मार्टी अहतिसारी