
30 सितंबर 1928 को सिघेतु मारमाटी, रोमानिया में एलीजर एली वीजेल का जन्म हुआ। एली वीजेल जाने माने अमेरिकी लेखक, प्रोफेसर, राजनीतिक कार्यकर्ता, नोबेल पुरस्कार विजेता बने। वे नाजी जर्मनी के यहूदी नरसंहार होलोकॉस्ट से बचे व्यक्ति थे। एली वीजेल 57 किताबें लिखीं, जिनमें उनकी चर्चित नाइट शामिल है यह किताब होलोकॉस्ट के दौरान ऑशविट्ज और बुचेनवाल्ड यातनाग्रहों में एक यहूदी कैदी के तौर पर एली वीजेल के अनुभवों पर आधारित है। पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के तौर पर, वीजेल होलोकॉस्ट के विषय पर नियमित रूप से बोलने वाले व्यक्ति बन गए और दुनिया भर में कई मुद्दों पर न्याय की वकालत की, जिनमें सोवियत और इथियोपियाई यहूदी, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद, रवांडा नरसंहार, बोस्नियाई नरसंहार, डार्फर युद्ध, कुर्द स्वतंत्रता आंदोलन, अर्मेनियाई नरसंहार, अर्जेंटीना के डेसापारेसिडोस (गायब हुए लोग), निकारागुआ के मिस्किटो लोग, श्रीलंकाई तमिल और कंबोडियाई नरसंहार शामिल हैं।
एली वीजेल इजराइल के मुखर समर्थक थे और अरब-इजराइल संघर्ष के बढ़ने और ईरान-इजराइल प्रॉक्सी संघर्ष के दौरान अक्सर देश के समर्थन में अपनी बात रखते थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू का समर्थन किया, जिसमें ईरान पर #ElieWiesel का 2015 का विवादास्पद कांग्रेस भाषण भी शामिल है और यहूदी बसने वालों की प्रशंसा करने वाले विज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यरूशलेम यहूदी लोगों का है और वहां क्षेत्रीय समझौते का विरोध किया। उन्होंने इजराइली-फिलिस्तीनी शांति प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए सीधी बातचीत की मेजबानी भी की। एली वीजेल नरसंहारों, यातनाओं और प्रताड़ाओं के मामले में वे एक तरह से पक्षपाती थे। दुनिया भर में जुल्म का विरोध किया लेकिन इस्राइल के फिलिस्तीन में नरसंहार और अवैध कब्जों का समर्थन किया। जबकि अरबों की जमीन इस्राइल की स्थापना के लिए अरबों को मूर्ख बनाकर ली गई थी। एली वीजेल को विटनेस पासिंग द टॉर्च ऑफ होलोकॉस्ट मेमोरी टू न्यू जेनरेशन्स प्रकाशन में शामिल किया गया है। बुचेनवाल्ड में कैद रहने के दौरान की एली वीजेल की तस्वीर के साथ 1990 के मार्च ऑफ द लिविंग से उनके शब्द उद्धृत किए गए थे, मैं हमेशा उन बच्चों को देखूंगा जिनमें अब रोने की ताकत नहीं है। मैं हमेशा उन बुजुर्गों को देखूंगा जिनमें अब उनकी मदद करने की ताकत नहीं है। मैं हमेशा माताओं और पिताओं, दादा-दादी और नाना-नानी, छोटे स्कूली बच्चों, उनके शिक्षकों, नेक और पवित्र लोगों को देखूंगा। हम उनके लिए रोने के लिए आँसू कहाँ से लाएँ? उनमें से किसके पास उनके लिए रोने की ताकत है?
कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि हम अन्याय को रोकने में बेबस हों, लेकिन ऐसा कभी नहीं होना चाहिए कि हम विरोध करने में नाकाम रहें।
दोस्ती जिंदगी पर प्यार से भी ज्यादा गहरा असर डालती है। प्यार के जुनून में बदलने का खतरा होता है, जबकि दोस्ती हमेशा सिर्फ साझा करने का नाम है।
दुनिया में कहीं भी इंसानी दुख हो, तो वह हर जगह के लोगों के लिए मायने रखता है।
हमें हमेशा किसी एक पक्ष को चुनना चाहिए। तटस्थता जालिम की मदद करती है, पीड़ित की नहीं। खामोशी सताने वाले का हौसला बढ़ाती है, सताए जाने वाले का नहीं।
मरने वालों को भूलना उन्हें दूसरी बार मारने जैसा होगा।
हमें किसी एक पक्ष को चुनना चाहिए। तटस्थता जालिम की मदद करती है, पीड़ित की नहीं। खामोशी सताने वाले का हौसला बढ़ाती है, सताए जाने वाले का नहीं। कभी-कभी हमें दखल देना पड़ता है। जब इंसानी जानें खतरे में हों, जब इंसानी गरिमा दांव पर हो, तो राष्ट्रीय सीमाएँ और भावनाएँ बेमानी हो जाती हैं। जहाँ भी लोगों को उनकी नस्ल, धर्म या राजनीतिक विचारों की वजह से सताया जाता है, वह जगह, उसी पल, दुनिया का केंद्र बन जानी चाहिए।
मैं वह रात कभी नहीं भूलूँगा, कैंप की वह पहली रात, जिसने मेरी जिंदगी को एक लंबी रात में बदल दिया सात बार अभिशप्त और सात बार सील की हुई मैं वे पल कभी नहीं भूलूँगा जिन्होंने मेरे भगवान और मेरी आत्मा की हत्या कर दी और मेरे सपनों को धूल में मिला दिया। मैं ये बातें कभी नहीं भूलूँगा, भले ही मुझे भगवान के बराबर समय तक जीने की सजा मिले। कभी नहीं।
मरने वालों और जिंदा लोगों के लिए, हमें गवाह बनना होगा।
सीखने में एक दैवीय सुंदरता है सीखने का मतलब है इस बात को स्वीकार करना कि जिंदगी मेरे जन्म के साथ शुरू नहीं हुई। मुझसे पहले भी लोग यहाँ आए हैं, और मैं उनके नक्शेकदम पर चलता हूँ। मैंने जो किताबें पढ़ी हैं, उन्हें पीढ़ियों से चले आ रहे पिताओं और बेटों, माताओं और बेटियों, गुरुओं और शिष्यों ने लिखा है। मैं उनके अनुभवों और उनकी खोजों का निचोड़ हूँ। और आप भी।
जब किसी इंसान में कृतज्ञता नहीं होती, तो उसकी इंसानियत में कुछ कमी रह जाती है। किसी इंसान की पहचान उसके कृतज्ञता के प्रति नजरिए से की जा सकती है।
ईमानदार व्यक्ति का एक कदम भी बदलाव ला सकता है। -एली वीजेल
मैं अपने भीतर मौजूद ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे मुझे उनसे सही सवाल पूछने की शक्ति दें।
कोई भी मानव जाति श्रेष्ठ नहीं है, कोई भी धार्मिक आस्था निम्न नहीं है। सभी सामूहिक निर्णय गलत होते हैं। केवल नस्लवादी ही ऐसे निर्णय लेते हैं।
अगर आप अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ धन्यवाद कहते हैं, तो भी वह काफी होगा।
जो व्यक्ति बच गया है और गवाही देने का फैसला करता है, उसके लिए यह साफ है, उसका फर्ज है कि वह मरे हुए और जिंदा लोगों के लिए गवाही दे। उसे आने वाली पीढ़ियों को उस अतीत से वंचित करने का कोई अधिकार नहीं है जो हमारी सामूहिक यादों का हिस्सा है। भूल जाना न केवल खतरनाक होगा बल्कि अपमानजनक भी, मरे हुए लोगों को भूलना उन्हें दूसरी बार मारने जैसा होगा।
तभी लिखें जब आप लिखने के बिना जी न सकें। सिर्फ वही लिखें जो आप अकेले लिख सकते हैं।
क्योंकि अंत में, सब कुछ यादों, उनके स्रोतों और उनके विस्तार, और निश्चित रूप से, उनके परिणामों के बारे में है।
मैंने कसम खाई कि जब भी और जहाँ भी इंसान दुख और अपमान सहेंगे, मैं कभी चुप नहीं रहूँगा। हमें पक्ष लेना होगा। तटस्थता जालिम की मदद करती है, पीड़ित की नहीं। चुप्पी सताने वाले का हौसला बढ़ाती है, सताए जाने वाले का नहीं।
मुझे वह मुस्कान हमेशा याद रहेगी। वह किस दुनिया से आई थी?
मैंने कसम खाई कि जब भी और जहाँ भी इंसान दुख और अपमान सहेंगे, मैं कभी चुप नहीं रहूँगा। हमें हमेशा पक्ष लेना होगा।
सिर्फ दोषी ही दोषी होते हैं। उनके बच्चे नहीं।
दिल पर एक और वार, नफरत करने की एक और वजह। जीने की एक वजह कम।
जहाँ भी पुरुषों और महिलाओं को उनकी जाति, धर्म या राजनीतिक विचारों के कारण सताया जाता है, वह जगह उसी पल ब्रह्मांड का केंद्र बन जानी चाहिए।
उसकी ठंडी आँखों ने मुझे घूरा। आखिरकार, उसने थके हुए अंदाज में कहा, मुझे किसी और से ज्यादा हिटलर पर भरोसा है। सिर्फ उसी ने यहूदी लोगों से किए गए अपने वादे निभाए हैं अपने सभी वादे।
कौन सी बात ज्यादा बुरी है? नफरत के साथ मारना या बिना नफरत के मारना?
वे इंसानों द्वारा एक-दूसरे के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपमान कर रहे हैं, ऐसे लोगों से यह कहना जिन्होंने बहुत ज्यादा दर्द और नुकसान सहा है, कि उनका दर्द और नुकसान महज एक भ्रम था।
हमें किसी भी व्यक्ति को सिर्फ एक विचार या अमूर्त चीज के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय, हमें हर व्यक्ति में एक ऐसी दुनिया देखनी चाहिए जिसके अपने राज हों, अपने खजाने हों, दुख की अपनी वजहें हों और थोड़ी-बहुत जीत भी हो।
रात दिन से ज्यादा पवित्र होती हैय यह सोचने, प्यार करने और सपने देखने के लिए बेहतर है। रात में सब कुछ ज्यादा गहरा और ज्यादा सच्चा लगता है। दिन में कहे गए शब्दों की गूँज का एक नया और गहरा मतलब समझ में आता है। इंसान की त्रासदी यह है कि वह दिन और रात के बीच फर्क करना नहीं जानता। वह रात में ऐसी बातें कहता है जो सिर्फ दिन में कही जानी चाहिए। -एली वीजेल
For the dead and the living, we must bear witness. — Elie Wiesel Holocaust survivor, Nobel Prize-winning American author, professor, and political activist
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