मुंबई। शेयर बाजार की हालत लगातार बदतर है। बीते सप्ताह भारत की 10 सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में से आठ का कुल बाजार पूंजीकरण 1.55 लाख करोड़ रुपए घट गया। वजह शेयर बाजार में बड़े स्तर पर बिकवाली होना रहा। एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। छुट्टियों के कारण कम कारोबारी सत्र वाले सप्ताह के दौरान प्रमुख शेयर सूचकांकों पर भारी दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी में 546.15 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार में कमजोरी का असर दिखाते हुए बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण चार कारोबारी सत्रों में 20.79 लाख करोड़ रुपए घट गया। यह 16 अक्टूबर के 472.62 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 451.83 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण में कुल 1,55,671.9 करोड़ रुपए की गिरावट आई। इसके विपरीत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ऐसी दो कंपनियां रहीं, जिनके बाजार पूंजीकरण में सप्ताह के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आंतरिक गड़बड़ियों से बदनाम एचडीएफसी बैंक के बाजार पूंजीकरण में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसका बाजार पूंजीकरण 55,506.95 करोड़ रुपए घटकर 10.67 लाख करोड़ रुपए रह गया। सप्ताह के दौरान बैंक के शेयरों में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई। बजाज फाइनेंस बाजार पूंजीकरण में गिरावट के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। कंपनी का मूल्यांकन 34,180.51 करोड़ रुपए घटकर 5.77 लाख करोड़ रुपए रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसका बाजार पूंजीकरण 27,065.08 करोड़ रुपए घटकर 16.10 लाख करोड़ रुपए रह गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन 21,062.24 करोड़ रुपए घटकर 4.81 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 9,360.75 करोड़ रुपए घटकर 11.79 लाख करोड़ रुपए रह गया, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का मूल्यांकन 4,338.46 करोड़ रुपए घटकर 8.83 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। इसी तरह इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण 2,881.38 करोड़ रुपए घटकर 4.69 लाख करोड़ रुपए रह गया, जबकि आईसीआईसीआई बैंक के मूल्यांकन में 1,276.53 करोड़ रुपए की गिरावट आई और यह 10.02 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियों में टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 23,517.56 करोड़ रुपए बढ़कर 9.15 लाख करोड़ रुपए हो गया। इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलएंडटी ने भी नकारात्मक रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया। इसका बाजार पूंजीकरण 1,788.66 करोड़ रुपए बढ़कर 5.02 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहने से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में रुझान बिकवाली का बना हुआ है और वे लगातार इक्विटी से पैसे निकाल रहे हैं। अक्टूबर में अब तक एफपीआई (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स) की कुल बिक्री 53,337 करोड़ रुपए रही है। इस दौरान एफपीआई ने भारतीय आईपीओ बाजार में 5,281 करोड़ रुपए का निवेश किया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, इस साल एक्सचेंजों के जरिए एफपीआई की कुल बिकवाली 3,69,164 करोड़ रुपए रही। निवेश प्रवाह के मोर्चे पर, एफपीआई लगातार 10वें हफ्ते शुद्ध बिकवाल बने रहे। 23 अक्टूबर को समाप्त हुए हफ्ते में एफपीआई ने अपनी बिकवाली काफी कम कर दी और दो दिन तो वे खरीदार भी बन गए। यूएस बॉन्ड यील्ड में नरमी (10-साल की यील्ड का 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आना), डॉलर के मुकाबले रुपए का मजबूत होकर 94.94 पर पहुंचना, विशेष रूप से लार्ज-कैप शेयरों का कम वैल्यूएशन, इन सभी कारकों ने एफपीआई की बिकवाली को कम करने में मदद की है।
इस हफ्ते बाजार का एक अहम ट्रेंड मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में आई भारी गिरावट रही। इस हफ्ते निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जबकि निफ्टी 50 ने बेहतर मजबूती दिखाई और इसमें केवल 2.35 प्रतिशत की ही गिरावट दर्ज की गई। बाजार विष्लेषकों का मानना है कि व्यापक बाजार में आई इस गिरावट की एक वजह मार्जिन-फंडेड लॉन्ग पोजीशन की फोर्सड लिक्विडेशन हो सकती है। लार्ज-कैप शेयरों की मजबूती का मुख्य कारण डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशकों) द्वारा इन शेयरों की खरीदारी है, जिनके पास निवेश के लिए काफी फंड मौजूद है। जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
जो कारण ऊपर बताए जा रहे हैं उसके अलावा और भी कुछ बड़े कारण हैं जिनके बारे में चर्चा नहीं होती। देशी और विदेशी निवेशक लगातार देख रहे हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाले कोई काम नहीं कर रही है बल्कि बाजार को चौपट करने वाले अनेक काम शिद्दत से करती रही है। पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी, फिर सीएए, एनआरसी, संपूर्ण लाकडाउन, खेती-किसान विरोधी तीन काले कानू और फिर मतदाता सूची गहन पुनर्निरीक्षण एसआईआर जैसे तमाम काम कर चुकी है। ऐसे तमाम कामों में जनता को उलझा दिया गया। जिससे काम धंधे खूब चौपट हुए। देश के उद्यमी और कारोबारी देश में निवेश करने के बजाय विदेश में निवेश करने लगे, अनेक धनपति भारत छोड़ गए। क्योंकि देश में काम करना सरकारी कार्रवाइयों ने दूभर कर दिया। इसके अलावा सरकार नौकरी देने और कोई अर्थव्यवस्था को गति देने वाले काम नहीं कर रही जिससे रोजगार और पैसा बने। विकसित भारत का ढोल तो खूब पीट रही है लेकिन उसके लिए कोई काम होता नजर नहीं आ रहा। आखिर पैसा पैदा किए बिना भारत कैसे विकसित होगा ? ऊपर से आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, सरकार लगातार कर्ज ले रही है। ऐसे में शेयर बाजार पूरे आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए व्यवहार कर रहा है।
Economy in slump Share Market capitalization of the top 8 most valuable companies fell by Rs. 1.55 lakh crore in October, while foreign investors pulled out Rs. 53,337 crore
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