
28 जून 1836 को मोंटपेलियर, ऑरेंज काउंटी, वर्जीनिया में प्रभावशाली अमेरिकी राजनेता, फाउंडिंग फादर (अमेरिका के संस्थापक पिता) 1809 से 1817 चौथे राष्ट्रपति रहे जेम्स मैडिसन (जेम्स मैडिसन जूनियर, जन्म 16 मार्च, 1751) का निधन हुआ। #JamesMadison को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान और बिल ऑफ राइट्स (अधिकारों के घोषणापत्र) का मसौदा तैयार करने और उसे बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका के कारण संविधान का जनक कहा जाता है। यहां पेश हैं जेम्स मैडिसन के कुछ प्रेरक, विचारणीय, अनुकरणीय उद्धरण
अगर हमारे देश पर कभी कब्जा किया गया, तो वह अंदर से ही किया जाएगा।
अत्याचारी तभी जुल्म कर सकते हैं जब उनके पास एक स्थायी सेना हो, प्रेस गुलाम हो और जनता निहत्थी हो।
संकट ही तानाशाह का मुख्य नारा होता है।
संविधान का उद्देश्य बहुमत की उस क्षमता को सीमित करना है जिससे वे अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
लोगों को निहत्था कर दो, उन्हें गुलाम बनाने का यह सबसे अच्छा और सबसे प्रभावी तरीका है।
हमने अपने नए देश का पूरा भविष्य सरकार की ताकत पर नहीं टिकाया है, बिल्कुल नहीं। हमने अपने सभी राजनीतिक संविधानों का भविष्य हममें से प्रत्येक की उस क्षमता पर टिकाया है जिसके द्वारा हम टेन कमांडमेंट्स (दस नैतिक आदेशों) के नैतिक सिद्धांतों के अनुसार खुद पर शासन कर सकें।
सभी शक्तियों, विधायी, कार्यकारी और न्यायिक, का एक ही हाथों में जमा होना, चाहे वे हाथ एक व्यक्ति के हों, कुछ लोगों के हों या बहुत से लोगों के, और चाहे वे वंशानुगत हों, खुद से चुने गए हों या चुनाव से आए हों, इसे सही मायने में तानाशाही की परिभाषा कहा जा सकता है।
अगर इंसान खुद पर शासन करने के लायक नहीं है, तो वह किसी और पर शासन करने के लायक कैसे हो सकता है?
ज्ञान हमेशा अज्ञानता पर शासन करेगा और जो लोग खुद पर शासन करना चाहते हैं, उन्हें ज्ञान से मिलने वाली शक्ति से खुद को लैस करना होगा।
आज हम काफी हद तक स्वतंत्र हैं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब हमारा गणतंत्र असंभव हो जाएगा। यह असंभव इसलिए होगा क्योंकि धन कुछ ही लोगों के हाथों में सिमट जाएगा। कोई गणतंत्र संगीनों (बंदूकों) के दम पर नहीं टिक सकता, और जब वह दिन आएगा जब देश का धन कुछ ही लोगों के हाथों में होगा, तो बदली हुई परिस्थितियों के अनुसार देश के कानूनों को फिर से व्यवस्थित करने के लिए हमें देश के सबसे समझदार लोगों की बुद्धिमत्ता पर निर्भर रहना होगा। असली ताकत लोगों के हाथ में होती है, और अगर फेडरल सरकार बहुत ज्यादा ताकतवर हो जाए और अपनी हद से आगे बढ़ जाए, तो लोग विरोध की योजनाएँ बनाएंगे और हथियार उठा लेंगे।
अगर इस देश में जुल्म और दमन आता है, तो वह किसी विदेशी दुश्मन से लड़ने के बहाने आएगा।
नागरिकों को अपनी और राज्य की रक्षा के लिए हथियार रखने के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जाएगा।
हमेशा समझदार राजनेता ही सत्ता नहीं संभालेंगे।
जुल्म का विरोध करना ईश्वर की सेवा है।
सेनाएँ, कर्ज और टैक्स, ये कुछ लोगों के दबदबे में बहुत से लोगों को लाने के जाने-माने तरीके हैं।
ज्ञान की प्रगति और उसका प्रसार ही सच्ची आजादी का एकमात्र रक्षक है।
कार्यपालिका को किसी भी हाल में यह तय करने का अधिकार नहीं है कि युद्ध की घोषणा करने का कारण है या नहीं।
अगर राष्ट्रपति संविधान को पलटने की कोशिश करते हैं, तो उन पर महाभियोग चलाया जा सकता है।
जन-कल्याण शब्दों के बारे में, मैंने हमेशा उन्हें उनसे जुड़ी शक्तियों के विवरण के दायरे में ही देखा है। उन्हें शाब्दिक और असीमित अर्थ में लेना संविधान को ऐसे रूप में बदल देना होगा, जिसके बारे में इसके बनाने वालों ने कभी नहीं सोचा था और इसके बहुत सारे सबूत मौजूद हैं।
जहाँ सत्ता का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, वहाँ किसी भी तरह की संपत्ति का उचित सम्मान नहीं किया जाता। कोई भी व्यक्ति अपनी राय, अपने शरीर, अपनी क्षमताओं या अपनी संपत्ति के मामले में सुरक्षित नहीं होता।
अमेरिका का भविष्य और सफलता इस संविधान में नहीं, बल्कि ईश्वर के उन नियमों में है जिन पर यह संविधान आधारित है।
चर्च और राज्य को अलग-अलग रखने का मकसद उस लगातार चलने वाले झगड़े को हमेशा के लिए इन तटों से दूर रखना है, जिसने सदियों से यूरोप की जमीन को खून से सराबोर कर रखा है।
विज्ञान की प्रगति और जानकारी का प्रसार सच्ची आजादी के लिए सबसे अच्छा पोषण है। -जेम्स मैडिसन
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