
11 जुलाई 1966 को न्यूयॉर्क शहर में प्रसिद्ध अमेरिकी कवि, नाटककार, निबंधकार और कथाकार डेलमोर श्वार्ट्ज (जन्म 8 दिसंबर, 1913) का निधन हुआ। 1943 से 1955 तक पार्टिसन रिव्यू और द न्यू रिपब्लिक पत्रिकाओं का संपादन किया। कई प्रतिष्ठित अखबारों के लिए लेखन किया। यहूद लेखक डेलमोर श्वार्ट्ज का जीवन उथल-पुथल और तनाव भरा रहा। इसका असर उनके लेखन में देखा जा सकता है। #DelmoreSchwartz की स्थिति उनकी एक कविता से भी पता चलती है-
वह भारी-भरकम भालू जो मेरे साथ चलता है,
जिसके चेहरे पर कई तरह का शहद लगा है,
जो यहाँ-वहाँ अनाड़ीपन से और भारी चाल से चलता है,
जो हर जगह का केंद्र-बिंदु है,
वह भूखा, हिंसक और जंगली जीव,
जिसे कैंडी, गुस्सा और नींद पसंद है,
एक पागल और सब कुछ अस्त-व्यस्त कर देने वाला,
जो इमारत पर चढ़ता है, फुटबॉल को लात मारता है,
नफरत से भरे शहर में अपने भाई को मुक्का मारता है।
यहां पेश हैं डेलमोर श्वार्ट्ज के कुछ उद्धरण और संवाद
हमें आप जो चाहें कहें, प्यार ने ही हमें ऐसा बनाया है।
वह कैसी आजादी थी जिसके लिए एक वयस्क इंसान सुबह उठता था, अगर उसका हर काम एक छोटे बच्चे की हावी होती यादों या साये से रुकता या प्रेरित होता था?
मैं एक ऐसी किताब हूँ जिसे न तो मैंने लिखा और न ही पढ़ा।
प्यार हिम्मत का सबसे मुश्किल और खतरनाक रूप है। हिम्मत प्यार का सबसे बेताब, सराहनीय और नेक रूप है।
समय वह स्कूल है जिसमें हम सीखते हैं,
समय वह आग है जिसमें हम जलते हैं।
अस्तित्ववाद का मतलब है कि कोई और आपके लिए नहा नहीं सकता।
हमारी इस जिंदगी में कोई शुरुआत नहीं होती, बस विदाई होती है जिसे शुरुआत का नाम दिया जाता है, ये उन औपचारिक भावनाओं से घिरी होती हैं जिन्हें सही माना जाता है और अक्सर थोपा जाता है। गुजरी हुई जिंदगी के हर पल से अंधेरा उभरता है और वह मरता नहीं है, क्योंकि हर घटना भारी दिमाग में हमेशा के लिए जीवित रहती है, खुद को फिर से जीने का इंतजार करती है।
क्योंकि कविता के बिना, हकीकत की चमक और शान,
सूर्यास्त के लाल रंगों की तरह फीकी पड़ जाती है।
कोई किसी को ज्यादा बेवकूफ नहीं बनाता, सिवाय खुद के, जैकब ने खुद से कहा। मैं खुद को कैसे बेवकूफ बनाता हूँ?
कहाँ से और कब, आएगी वह सच्चाई, एक ऐसी आवाज की जो मन की बात कहे, हरी खिड़की के पर्दे पर तेज धूप, और खुद को साफ-साफ और प्यार से जाहिर करना, आराम, गर्माहट, रोशनी, सब कुछ साफ-साफ दिखना जब सफेद बिस्तर पर सब कुछ नया बनता है।
मैं अपने पिता की बहुत तारीफ करता था, सोलह साल की उम्र में। लेकिन अब मुझे समझ आता है कि वह एक बेरहम और क्रूर इंसान था, पर उसे पछतावा भी होता था, और यही बात हमें परेशान करती थी, उसका यह बदलता हुआ बर्ताव।
यहूदी एक ही समय में अलग-थलग भी है और जिसे मिटाया न जा सके, ऐसा भी, वह अपने देश से तो दूर है ही, खुद से भी दूर है, फिर भी इतिहास के विनाशकारी तूफान में भी वह बचा रहता है।
जहाँ रोशनी है, और हर चीज साफ दिखती है, सबसे अलग, अपनी जगह पर खड़ी, मैं समय को पीता हूँ और पास की हर चीज को छूता हूँ, और उस दिन की उम्मीद करता हूँ जब पूरी दुनिया का चेहरा ऐसा ही होगा, क्योंकि हर साल उसके वर्तमान को क्या चीज सुरक्षित रखती है? अंधेरे हादसों में मन की काफी कृपा।
बड़ी रचना वह है जिसमें देखी हुई बात को इस तरह कहा जाए कि उसे दोबारा कहने की जरूरत न पड़े, ताकि जो देखा गया है, वह असलियत में और अस्तित्व में बढ़ सके और बदल सके। -डेलमोर श्वार्ट्ज
Love is the most difficult and dangerous form of courage, Evocative quote by the Jewish-American storyteller, poet, essayist, playwright, and editor Delmore Schwartz

