
13 जुलाई 1863 को कलकत्ता, ब्रिटिश भारत (अब कोलकाता) में मार्गरेट ऐलिस मरे का जन्म हुआ। मार्गरेट ऐलिस मरे जानी मानी ब्रिटिश मिस्र-विज्ञानी (इजिप्टोलॉजिस्ट), पुरातत्वविद्, मानवविज्ञानी, इतिहासकार और लोककथा-विज्ञानी बनीं। यूनाइटेड किंगडम में पुरातत्व की लेक्चरर नियुक्त होने वाली पहली महिला मार्गरेट ऐलिस मरे ने 1898 से 1935 तक यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में काम किया। वह 1953 से 1955 तक फोकलोर सोसाइटी की अध्यक्ष रहीं और उन्होंने साहित्य, लेख, निबंध इत्यादि प्रकाशित किए। मरे पहली लहर के नारीवादी आंदोलन में पूरी शिद्दत से शामिल हुईं, विमेंस सोशल एंड पॉलीटिकल यूनियन से जुड़ीं और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने में काफी श्रम किया। उन्होंने अपना शोध विच-कल्ट हाइपोथिसिस (डायन-पंथ परिकल्पना) पर केंद्रित किया। यह सिद्धांत कहता था कि शुरुआती आधुनिक ईसाई जगत में डायनों पर चलाए गए मुकदमे असल में एक बचे हुए पूर्व-ईसाई, मूर्तिपूजक धर्म को खत्म करने की कोशिश थे, जो एक सींग वाले देवता को समर्पित था। अकादमिक रूप से इसे गलत माना गया, लेकिन इस सिद्धांत ने काफी ध्यान आकर्षित किया और विक्का नामक नए धार्मिक आंदोलन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। 1921 से 1931 के बीच उन्होंने माल्टा और मिनोरका में प्रागैतिहासिक स्थलों की खुदाई की और लोककथा-विज्ञान में अपनी जानकारी बढ़ाई। 1927 में उन्हें मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया, 1928 में उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया और 1935 में वह यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से रिटायर हो गईं। टॉल अल-अज्जुल में पेट्री की खुदाई में मदद करने के लिए फिलिस्तीन के ब्रिटिश मैंडेट (आज का इजराइल, जॉर्डन और फिलिस्तीनी क्षेत्र) का दौरा किया और 1937 में पेट्रा, जॉर्डन में एक छोटी खुदाई का नेतृत्व किया। बाद के जीवन में फोकलोर सोसाइटी की अध्यक्षता संभालने के साथ-साथ, उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और सिटी लिटरेरी इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों में लेक्चर दिए और अपनी मृत्यु तक प्रकाशन का काम जारी रखा। मार्गरेट ऐलिस मरे का जीवन एक सौ वर्ष से अधिक समय का रहा 13 जुलाई 1863 को जन्मी मार्गरेट ऐलिस मरे का निधन 13 नवंबर 1963 को वेल्विन, ब्रिटेन में हुआ। ब्रिटिश भारत के कलकत्ता में एक अमीर मध्यम-वर्गीय अंग्रेज परिवार में जन्मीं मरे ने अपनी जवानी का समय भारत, ब्रिटेन और जर्मनी में बिताया और प्रारंभ में नर्स व सोशल वर्कर के तौर पर ट्रेनिंग ली।
MargaretAliceMurray की धारणाएं विवादास्पद रहीं, उन्होंने डायनों, चुड़ैलों के अस्तित्व को एक प्रकार से स्वीकार किया। बाद के लोक-संस्कृति विशेषज्ञों कैरोलिन ओट्स और जूलियट वुड ने कहा है कि मार्गरेट मरे अपनी चुड़ैल-पंथ थ्योरी के लिए सबसे ज्यादा जानी गईं और उनकी जीवनी लिखने वाली मार्गरेट एस. ड्रोवर ने यह राय व्यक्त की कि इसी विषय पर उनके काम ने शायद किसी भी अन्य काम की तुलना में उन्हें आम जनता के बीच मशहूर कियाष्। यह दावा किया गया है कि मरे का काम डायन मुकदमों का पहला नारीवादी अध्ययन था और साथ ही यह पहला ऐसा अध्ययन था जिसने असल में डायनों को सशक्त बनाया क्योंकि इसने (ज्यादातर महिला) आरोपियों को अपनी मर्जी से काम करने की आजादी दी और उनसे पूछताछ करने वालों से अलग अपनी बात रखने का मौका दिया। यह थ्योरी कुछ हद तक इसलिए गलत थी क्योंकि उनकी सारी एकेडमिक ट्रेनिंग इजिप्टोलॉजी (मिस्र के अध्ययन) में हुई थी और उन्हें यूरोप के इतिहास की कोई जानकारी नहीं थी और इसलिए भी क्योंकि उनमें बहुत कम सबूतों के आधार पर ही बड़ी-बड़ी बातें मान लेने या सामान्यीकरण करने की आदत थी।
सरकारें अंडरवियर की तरह होती हैं। अगर आप उन्हें समय-समय पर न बदलें, तो उनमें से बहुत बुरी बदबू आने लगती है।
पुरातत्व खुद मानवता का अध्ययन है, और जब तक इस विषय के प्रति यह नजरिया ध्यान में नहीं रखा जाता, तब तक पुरातत्व असंभव सिद्धांतों या चकमक पत्थर के टुकड़ों के ढेर में खो जाएगा। आजकल हर तरह की जानकारी में किसी एक खास विषय में माहिर होने का चलन है, लेकिन पुरातत्व विज्ञान में वे सभी गुण हैं जो मानव जाति को व्यापक नजरिए से देखने की मांग करते हैं, यानी जंगली अवस्था से सभ्य अवस्था तक के विकास को देखना, जो सामाजिक और धार्मिक विकास के सभी चरणों में दिखाई देता है।
मुझे लगता है कि मेरा उत्साह दूसरों में भी फैल जाता है।
मैं बहुत नखरे वाली हूँ। लोग मेरे साथ फिल्म देखने जाने से कतराते हैं।
लीन डैनियल नामक एक टिप्पणीकार ने मार्गरेट मरे के बारे में लिखा है, मैं उनके सौवें जन्मदिन की पार्टी में गया था, जहाँ वे परिवार और दोस्तों के बीच एक रानी की तरह बैठी थीं, इसके लिए इससे बेहतर कोई शब्द नहीं है। एक दूर की चचेरी बहन, जिसे हम अस्सी साल की बुजुर्ग महिला कहेंगे, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले और भी दूर के रिश्तेदारों की शुभकामनाएँ लेकर आई थी और अचानक एक नाम भूल गई, जैसा कि उनसे आधी उम्र और मा मरे की उम्र के एक-तिहाई उम्र वाले लोगों के साथ भी होता है। मैं कितनी बेवकूफ हूँ, कजिन मार्गरेट, उन्होंने कहा, कितनी बेवकूफ हूँ कि नाम मेरे दिमाग से बिल्कुल निकल गया। मा मरे ने अपनी नजरें उस बुजुर्ग महिला पर टिका दीं जो उनसे बीस साल छोटी थीं, ठंडी नजरें जिनमें भावनाएँ मानो अनंत काल की तटस्थता में खो गई थीं, और धीरे और प्यार से कहा, बेवकूफी नहीं, मेरी प्यारी। बेवकूफी नहीं, बस दिमागी आलस।
जैक्लीन सिम्पसन ने लिखा, ब्रिटेन का कोई भी लोक-संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. मार्गरेट मरे को शर्मिंदगी और विरोधाभास की भावना के बिना याद नहीं कर सकता। वह उन कुछ लोक-संस्कृति विशेषज्ञों में से एक हैं जिनका नाम आम जनता के बीच बहुत मशहूर हुआ, लेकिन विद्वानों के बीच उनकी प्रतिष्ठा सही मायनों में कम है, उनकी यह थ्योरी कि चुड़ैलें एक बहुत बड़े गुप्त संगठन की सदस्य थीं जो सदियों से प्रागैतिहासिक प्रजनन-पूजा को बचाए हुए था, अब पूरी तरह से गलत तरीकों और बेतुकी दलीलों पर आधारित मानी जाती है। यह तथ्य कि बुढ़ापे में और तीन अजीबोगरीब किताबें लिखने के बाद उन्हें लोक-संस्कृति सोसाइटी का अध्यक्ष बनाया गया, निश्चित रूप से सोसाइटी की प्रतिष्ठा और शायद इस देश में लोक-संस्कृति अध्ययन के दर्जे को नुकसान पहुँचाया होगा, इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ इतिहासकार अभी भी हमारे विषय के प्रति अविश्वास क्यों रखते हैं। -मार्गरेट ऐलिस मरे
Witches were members of a vast secret organization … The work and statements of Margaret Alice Murray—a British archaeologist, anthropologist, historian, and folklorist born in Calcutta
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