24 जून 1915 को यूनियन सिटी, न्यू जर्सी में नॉर्मन कजिन्स का जन्म हुआ। नॉर्मन कजिन्स प्रसिद्ध अमेरिकी राजनीतिक पत्रकार, लेखक, प्रोफेसर और वर्ल्ड स्टेट (विश्व सरकार) के जरिए विश्व शांति के समर्थक बने। नॉर्मन कजिन्स 1934 में न्यूयॉर्क इवनिंग पोस्ट (अब न्यूयॉर्क पोस्ट) अखबार की टीम में शामिल हुए और 1935 में करंट हिस्ट्री ने उन्हें अपना बुक क्रिटिक (पुस्तक समीक्षक) नियुक्त किया। नॉर्मन कजिन्स सैटरडे रिव्यू ऑफ लिटरेचर (बाद में नाम बदलकर सैटरडे रिव्यू) अखबार के स्टाफ टीम में शामिल हो गए। 1942 में उन्हें एडिटर-इन-चीफ बनाया गया, जिस पद पर #NormanCousins 1972 तक रहे। उनकी देखरेख में अखबार का सर्कुलेशन 20,000 से बढ़कर 6,50,000 हो गया। नॉर्मन कजिन्स 1978 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स की फैकल्टी में शामिल हुए और साइकियाट्री और बायोबिहेवियरल साइंसेज डिपार्टमेंट में एडजंक्ट प्रोफेसर बने जहां उन्होंने एथिक्स (नीतिशास्त्र) और मेडिकल लिटरेचर पढ़ाया। उनकी रिसर्च का मुख्य विषय नजरिए और सेहत के बीच का संबंध था।
यहां पेश हैं नॉर्मन कजिन्स के विचारणीय, अनुकरणीय,प्रेरक उद्धरण
मौत जिंदगी का सबसे बड़ा नुकसान नहीं है। सबसे बड़ा नुकसान वह है जो हमारे जीते-जी हमारे अंदर मर जाता है।
हर मरीज के अंदर उसका अपना डॉक्टर होता है।
जिंदगी माफी का एक रोमांचक सफर है।
अगर आपकी वजह से दूसरों में कुछ नया जागता है, तो आपने अमरता की ओर एक कदम बढ़ाया है।
इतिहास एक बहुत बड़ा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (पहले से चेतावनी देने वाला तंत्र) है।
आपकी जिंदगी का कंट्रोल सेंटर आपका नजरिया है।
हँसी अंदरूनी जॉगिंग है।
मैंने सीखा है कि इंसानी दिमाग और शरीर की दोबारा ठीक होने या नई ऊर्जा पाने की क्षमता को कभी कम नहीं आंकना चाहिए, तब भी नहीं जब हालात बहुत बुरे लग रहे हों।
जीवन शक्ति शायद धरती पर सबसे कम समझी जाने वाली शक्ति है।
इंसान में बहुत ज्यादा दया और बहुत ज्यादा बेरुखी, दोनों ही भावनाएँ हो सकती हैं। उसके पास दया को बढ़ाने और बेरुखी को पीछे छोड़ने की क्षमता होती है।
सुकरात की मशहूर मिसाल को थोड़ा बदलकर कहें तो, लाइब्रेरी विचारों के जन्म का स्थान होनी चाहिए एक ऐसी जगह जहाँ इतिहास जिंदा हो उठता है।
जैसे ब्रह्मांड में मूल ऊर्जा का कभी नाश नहीं होता, वैसे ही किसी भी विचार या काम का कोई न कोई असर जरूर होता है, चाहे वह अभी दिखे या बाद में, दिखाई दे या न दे, महसूस हो या न हो।
हँसी सकारात्मक भावनाओं को जगाने का एक जबरदस्त जरिया है।
किताब को पढ़ने का तरीका यानी पाठक किताब के प्रति कैसी सोच या गुण लेकर आता है, किताब की अहमियत तय करने में उतना ही बड़ा रोल निभाता है जितना लेखक की लिखी बातें।
कुछ लोग असल में इतना नहीं जानते कि किसी इंसान के बारे में कोई बुरा फैसला सुना सकें।
मौत जिंदगी का सबसे बड़ा दुख नहीं है। सबसे बड़ा दुख है अपनी पहचान खो देना किसी अजनबी और बेजान जगह पर मरना, उस आध्यात्मिक सहारे से दूर होकर जो किसी प्यार भरे हाथ के स्पर्श से मिलता है, उन चीजों को महसूस करने की चाहत से दूर होकर जो जिंदगी को जीने लायक बनाती हैं, उम्मीद से दूर होकर।
अगर दर्द की असलियत के बारे में जानकारी कम है, तो दर्द कम करने वाली दवाओं के बारे में जानकारी और भी कम है। आम तौर पर लोग यह नहीं समझते कि दर्द कम करने वाली कई मशहूर दवाएँ असल वजह को ठीक किए बिना दर्द को छिपा देती हैं। वे शरीर के उस सिस्टम को सुन्न कर देती हैं जो दिमाग को बताता है कि कुछ गड़बड़ हो सकती है। दर्द की असल वजह जाने बिना उसे दबाने की भारी कीमत शरीर को चुकानी पड़ सकती है।
लाइब्रेरी किताबों की पूजा करने की जगह नहीं है। यह कोई ऐसा मंदिर नहीं है जहाँ साहित्य की अगरबत्ती जलानी हो या बँधी हुई किताबों के प्रति अपनी श्रद्धा रस्मों-रिवाजों से दिखानी हो।
युद्ध इंसानी दिमाग की उपज है। इंसानी दिमाग न्याय के साथ शांति का भी रास्ता निकाल सकता है।
जिंदगी का दुख मौत नहीं है, बल्कि वह चीज है जिसे हम अपने अंदर मरने देते हैं… हम जिस दौर में जी रहे हैं, उसमें जो लोग खुद को दुनिया का नागरिक मानने की आदत डालते हैं, वे समझदारी की पहली शर्त पूरी कर रहे होते हैं।
हर बीमारी को हराया नहीं जा सकता। लेकिन बहुत से लोग बीमारी को अपनी जिंदगी पर जरूरत से ज्यादा असर डालने देते हैं। वे बिना वजह हार मान लेते हैं। वे सीधे खड़े रहने की अपनी ताकत को नजरअंदाज करते हैं और उसे कमजोर कर लेते हैं। बीमारी के बावजूद, हमेशा एक ऐसी गुंजाइश होती है जिसमें जिंदगी को मकसद के साथ और थोड़ी-बहुत खुशी के साथ भी जिया जा सकता है।
विश्वास ही शरीर का हिस्सा बन जाता है। -नॉर्मन कजिन्स
कृपया हमारी Hindi News Website : https://www.peoplesfriend.in देखिए, अपने सुझाव दीजिए ! धन्यवाद !
प्रेस / मीडिया विशेष – आप अपने समाचार, विज्ञापन, रचनाएं छपवाने, समाचार पत्र, पत्रिका पंजीयन, सोशल मीडिया, समाचार वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, कंटेंट राइटिंग इत्यादि प्रेस/मीडिया विषयक कार्यों हेतु व्हाट्सऐप 9411175848 पर संपर्क करें।