
6 जून 1872 को लॉरेंस, न्यूजीलैंड में आर्थर हेनरी एडम्स का जन्म हुआ। आर्थर हेनरी एडम्स जाने माने पत्रकार, कथाकार, नाटककार, कवि और लेखक बने। उन्होंने अपना करियर न्यूजीलैंड में शुरू किया किंतु बाद में उनका अधिकांश समय ऑस्ट्रेलिया में बीता। वे कुछ समय के लिए चीन और लंदन में भी रहे। आर्थर एडम्स ने ओटागो यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की, जहाँ से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ली और कानून की पढ़ाई शुरू की। फिर उन्होंने कानून की पढ़ाई छोड़कर वेलिंगटन में पत्रकार बनने का फैसला किया, जहाँ उन्होंने सिडनी की पत्रिका द बुलेटिन के लिए कविताएँ लिखना शुरू किया। 1898 में वे सिडनी चले गए और जाने-माने थिएटर मैनेजर जे.सी. विलियमसन के निजी सचिव और साहित्यिक सलाहकार के तौर पर काम करने लगे। 1900 में एडम्स ने द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड और न्यूजीलैंड के कई अखबारों के लिए पत्रकार के तौर पर बॉक्सर विद्रोह की रिपोर्टिंग करने के लिए चीन की यात्रा की। वे एक बार न्यूजीलैंड लौटे और फिर 1902 में लंदन चले गए, जहाँ उन्होंने कई रचनाएँ प्रकाशित कीं, जिनमें द नाजरीन (1902) और कविताओं का संग्रह लंदन स्ट्रीट्स (1906) शामिल हैं। एडम्स 1906 में ऑस्ट्रेलिया लौटे और 1909 तक द बुलेटिन के रेड पेज के संपादक के तौर पर ए.जी. स्टीफंस की जगह पदभार संभाला। अपनी कविताओं के अलावा, आर्थर हेनरी एडम्स ने नाटक और उपन्यास भी लिखे। उनका सबसे सफल नाटक मिसेज प्रिटी एंड द प्रीमियर था, जिसे 1914 में मेलबर्न रिपर्टरी थिएटर ने प्रस्तुत किया था। आर्थर हेनरी एडम्स के कुछ विचारणीय उद्धरण यहां प्रस्तुत हैं
मेरा पक्का यकीन है कि कुछ और सदियों के बाद, विज्ञान इंसान का मालिक बन जाएगा। जिन इंजनों का आविष्कार उसने किया होगा, उन्हें कंट्रोल करना उसकी ताकत से बाहर होगा। एक दिन, विज्ञान के हाथ में इंसानों का अस्तित्व होगा, और इंसान दुनिया को उड़ाकर खुदकुशी कर लेंगे।
प्रेस पैसे वाले सिस्टम का किराए का एजेंट है, और इसे सिर्फ इसलिए बनाया गया है ताकि जहाँ उनके फायदे की बात हो, वहाँ झूठ बोला जा सके। किसी पर भी और किसी भी चीज पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
एक टीचर हमेशा के लिए असर डालता है, वह कभी नहीं बता सकता कि उसका असर कहाँ जाकर रुकेगा।
अगर हम सच में अपने बेकार हो चुके सिस्टम में सुधार करने की कोशिश करेंगे, तो समाज का पूरा ढाँचा बर्बाद हो जाएगा। ऊपर से नीचे तक पूरा सिस्टम ही धोखाधड़ी है हम सब यह जानते हैं, मजदूर और पूँजीपति, दोनों ही, और हम सब इसमें शामिल हैं।
अराजकता प्रकृति का नियम था, व्यवस्था इंसान का सपना।
हर अनुभव एक मेहराब की तरह होता है, जिस पर आगे की इमारत खड़ी की जा सकती है।
राजनीति असल में नफरत को संगठित करने का ही एक तरीका है।
जीवन का इंडियन समर (बुढ़ापे का सुखद दौर) उस मौसम की तरह ही थोड़ा धूप वाला और थोड़ा उदास होना चाहिए, उसमें गहराई और समृद्धि तो हो, लेकिन जल्दबाजी बिल्कुल न हो।
आधुनिक राजनीति असल में इंसानों के बीच नहीं, बल्कि ताकतों के बीच का संघर्ष है। इंसान हर साल ताकत के गुलाम बनते जा रहे हैं और केंद्रीय सत्ता-केंद्रों के इर्द-गिर्द जमा हो रहे हैं। अब टकराव इंसानों के बीच नहीं, बल्कि उन ताकतों के बीच है जो इंसानों को चलाती हैं और इंसान अक्सर अपनी ही प्रेरक ताकतों के आगे घुटने टेक देते हैं।
जो लोग सीखना जानते हैं, वे ही असल में जानकार होते हैं।
औसत बुद्धि को कम करके आंकने जैसी कोई चीज नहीं होती।
सीनेटर बेगोनिया के फूल जैसा होता है दिखावटी, पर बेकार।
तमाम तरह की पढ़ाई-लिखाई में से, जिससे वह सबसे ज्यादा बचना चाहता था, वह था अपने ही मन का अध्ययन। आत्म-मंथन से ज्यादा दिल तोड़ने वाली कोई त्रासदी उसके लिए नहीं थी।
राजनीति, चाहे उसके दावे कुछ भी हों, असल में हमेशा से नफरत को व्यवस्थित रूप से संगठित करने का ही काम रही है।
हो सकता है कि किसी दिन विज्ञान के हाथ में इंसानों का अस्तित्व हो, और मानव जाति दुनिया को उड़ाकर आत्महत्या कर ले।
कांग्रेसी के साथ आप चतुराई से काम नहीं ले सकते! कांग्रेसी एक सुअर होता है! आपको डंडा उठाना होगा और उसकी थूथन पर मारना होगा!
कोई भी इंसान अपनी कही हर बात का मतलब वही नहीं रखता जो वह कहता है, और फिर भी बहुत कम लोग अपनी पूरी बात कह पाते हैं, क्योंकि शब्द फिसलने वाले होते हैं और विचार गाढ़े-चिपचिपे।
हर इंसान के पास एक ठीक-ठाक आकार का कब्रिस्तान होना चाहिए, जिसमें वह अपने दोस्तों की कमियों को दफना सके।
सभी तरह के टैक्स एक बुराई हैं, लेकिन हर चीज पर बिना सोचे-समझे भारी टैक्स लगाना लोगों के लिए सबसे बड़े अभिशापों में से एक है।
जीवन भर में एक दोस्त मिलना ही बहुत बड़ी बात है, दो दोस्त बहुत ज्यादा हैं और तीन दोस्त मिलना तो लगभग नामुमकिन है। दोस्ती के लिए जीवन में एक जैसी समानता, विचारों का मेल और लक्ष्यों में एक-दूसरे से आगे निकलने की स्वस्थ होड़ जरूरी है।
नैतिकता एक निजी और महंगी विलासिता है।
माता-पिता जीवन तो देते हैं, लेकिन माता-पिता के तौर पर वे इससे ज्यादा कुछ नहीं देते। हत्यारा जान लेता है, लेकिन उसका काम वहीं खत्म हो जाता है। एक शिक्षक का प्रभाव अनंत काल तक रहता है वह कभी नहीं जान सकता कि उसका असर कहाँ जाकर रुकेगा। -आर्थर हेनरी एडम्स #ArthurHenryAdams #Thoughts
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