3 जुलाई 1683 को एडवर्ड यंग का बपतिस्मा हुआ। बपतिस्मा जन्म के बाद होने वाला नामकरण जैसा धार्मिक संस्कार है। एडवर्ड यंग अपने समय के प्रसिद्ध अंग्रेज कवि, नाटककार और साहित्य समीक्षक (नाइट-थॉट्स) बने। #EdwardYoung को मुख्य रूप से नाइट-थॉट्स के लिए याद किया जाता है, बिना तुकबंदी वाली कविता (ब्लैंक वर्स) में लिखी गई दार्शनिक रचनाओं की एक श्रृंखला है। इसमें कई अपनों को खोने के बाद उनकी मनःस्थिति की झलक मिलती है। यह उस सदी की सबसे लोकप्रिय कविताओं में से एक थी, जिसने दिग्गज रचनाकारों जोहान वोल्फगैंग वॉन गोएथे और एडमंड बर्क जैसे अनेक लोगों को प्रभावित किया। बाद में प्रतिष्ठित, चर्चित अंग्रेज कवि, चित्रकार और प्रिंटमेकर विलियम ब्लेक ने नाइट-थॉट्स को चित्रों के साथ सजाया था। अपनी प्रतिष्ठता के बावजूद यंग ने पादरी का पद ग्रहण किया और ऊँचे पद की चाह में कई चापलूसी भरे पत्र लिखे, जिससे उन पर दिखावटीपन का आरोप लगा। एडवर्ड यंग का जन्म अपने पिता एडवर्ड यंग (सैलिसबरी के डीन) के विनचेस्टर के पास अपहम में रेक्टरी (पादरी के आवास) में हुआ था, जहाँ 3 जुलाई 1683 को उनका बपतिस्मा हुआ। उन्होंने विनचेस्टर कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और 1702 में ऑक्सफोर्ड के न्यू कॉलेज में दाखिला लिया। आगे चलकर एडवर्ड यंग कॉर्पस क्रिस्टी चले गए और 1708 में आर्कबिशप टेनिसन द्वारा उन्हें ऑल सोल्स में लॉ फेलोशिप के लिए नामित किया गया। उन्होंने 1719 में डॉक्टर ऑफ कैनन लॉ की डिग्री प्राप्त की। एक वक्तव्य में एडवर्ड यंग कहते हैं, मैं प्रतिभा की तुलना सदाचार से और ज्ञान की तुलना धन से करूँगा। जैसे धन की सबसे अधिक आवश्यकता वहाँ होती है जहाँ सदाचार सबसे कम हो, वैसे ही ज्ञान की आवश्यकता वहाँ होती है जहाँ प्रतिभा सबसे कम हो। जैसे बिना अधिक धन के भी सदाचार खुशी दे सकता है, वैसे ही बिना अधिक ज्ञान के भी प्रतिभा ख्याति दिला सकती है ज्ञान उधार लिया हुआ ज्ञान है, प्रतिभा जन्मजात ज्ञान है, और पूरी तरह से हमारी अपनी है।
यहां प्रस्तुत हैं एडवर्ड यंग के कुछ चुटीले, विचारणीय उद्धरण
दोस्ती जीवन की शराब है।
दुःख की घड़ी एक अच्छे इंसान के लिए चमकने का समय होती है।
हम सभी मौलिक रूप से पैदा होते हैं, तो फिर हममें से इतने सारे लोग दूसरों की नकल बनकर क्यों मरते हैं?
स्वस्थ मन का पहला पक्का लक्षण है मन की शांति और घर पर खुशी का अनुभव होना।
तीस की उम्र में आदमी खुद को मूर्ख समझने लगता है, चालीस की उम्र में उसे यह पता चलता है और वह अपनी योजना में सुधार करता है, पचास की उम्र में वह अपनी कुख्यात देरी के लिए खुद को कोसता है, अपने समझदारी भरे मकसद को संकल्प में बदलने की कोशिश करता है, विचारों की महानता के साथ, संकल्प करता है, और बार-बार संकल्प करता है, फिर वैसा ही मर जाता है।
टालमटोल समय का चोर है, यह साल-दर-साल समय चुराता रहता है, जब तक कि सारा समय बीत नहीं जाता, और अनंत काल के विशाल कार्यों को एक पल की दया पर छोड़ देता है।
हर हाल में अकेले रहने के लिए कुछ समय निकालें। कुछ लोग शोहरत के लिए थोड़ी-बहुत जानकारी पर ही इतराते हैं, और सोचते हैं कि दूसरों की बातें दोहराकर वे अमर हो जाएंगे।
वह अपने नाश्ते के लिए भी कोई न कोई योजना बनाती है, और बिना किसी चाल-ढाल के चाय भी नहीं पीती।
किसी भी चीज को मामूली न समझें, भले ही वह छोटी दिखे, रेत के छोटे-छोटे कणों से पहाड़ बनता है, पलों से साल बनता है, और छोटी-छोटी चीजों से जिंदगी बनती है।
कमजोर लोगों के पास इलाज होते हैं, समझदार लोगों के पास खुशियाँ, बड़ी समझदारी ही सबसे बड़ी खुशी है।
सभी के लिए आजादी मिलने से पहले ही, हर इंसान के लिए आजादी का अस्तित्व था।
प्रकृति को पढ़ें, प्रकृति सच्चाई की दोस्त है।
रात के समय एक नास्तिक भी थोड़ा-बहुत भगवान पर यकीन करने लगता है।
सभी लोग सोचते हैं कि बाकी सब तो नश्वर हैं, बस वे खुद नहीं।
यह रात मेरी है, अपने सभी तारों के साथ।
मैंने तेज-तर्रार जिंदगी में खुशी ढूँढने की कोशिश की, लेकिन वहाँ वह नहीं मिली। मैंने पैसे में उसे ढूँढने की कोशिश की, लेकिन वहाँ भी वह नहीं मिली।
लेकिन अगर कोई मौलिक रचना इतनी बेहतरीन और नई हो कि हैरानी के साथ-साथ तारीफ भी जगाए, तो हम लेखक की मर्जी पर निर्भर हो जाते हैं, उसकी कल्पना की मजबूत उड़ान हमें ब्रिटेन से इटली, एक मौसम से दूसरे मौसम, एक मजे से दूसरे मजे तक ले जाती है, हमारा अपना कोई घर या विचार नहीं रह जाता, जब तक कि जादूगर अपनी कलम नीचे न रख दे, और फिर हम वापस अपनी असलियत में लौट आते हैं, और उस बदलाव पर अफसोस करते हैं, जैसे कोई भिखारी जिसने राजकुमार बनने का सपना देखा हो।
हम जिस चीज की शिद्दत से चाहत करते हैं, जल्द ही उस पर यकीन करने लगते हैं।
जीनियस या प्रतिभाशाली होने का क्या मतलब है, सिवाय इसके कि बिना उन साधनों के भी बड़े काम कर दिखाए जाएँ जिन्हें आम तौर पर उन कामों के लिए जरूरी माना जाता है?
लेकिन हम क्या हैं? आपने कभी इंसान के बारे में नहीं सुना, या पृथ्वी के बारे में जो ब्रह्मांड का पागलखाना है!
जहाँ समझदारी, जो आप लोगों के बीच बीमार नहीं है, पागल हो जाती है और मूर्खता की संतानों को अपनी संतान मानकर पालती-पोसती है। -एडवर्ड यंग