
1 जुलाई 1882 को पटना, बंगाल प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश भारत (आज का बिहार) बिधान चंद्र रॉय का जन्म हुआ। बिधान चंद्र रॉय प्रसिद्ध डॉक्टर और राजनेता बने। 1950 से 1962 में अपनी मृत्यु तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने साल्ट लेक (अब बिधाननगर नगर निगम का हिस्सा) कल्याणी, दुर्गापुर और अशोकनगर कल्याणगढ़ जैसे कई संस्थानों और शहरों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। भारत में उनकी याद में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। उन्हें 1961 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। संयोग की बात है कि उनके जन्म दिन की तिथि ही उनकी पुण्यतिथि भी है।
1 जुलाई 1962 को कलकत्ता में बिधान चंद्र रॉय का निधन हुआ।
एक मौके पर पश्चिम बंगाल के लोगों को संबोधित करते हुए बिधान चंद्र रॉय ने कहा था कि हमारे पास क्षमता है और अगर हम अपने भविष्य में विश्वास रखते हुए दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करें, तो मुझे यकीन है कि कोई भी चीज, कोई भी बाधा, चाहे वह अभी कितनी भी बड़ी या मुश्किल क्यों न लगे, हमारी प्रगति को नहीं रोक सकती (अगर हम) सब मिलकर काम करें, अपना विजन साफ रखें और अपनी समस्याओं को अच्छी तरह समझें। सुपरहिट फिल्म बावर्ची में राजेश खन्ना ने मुख्य किरदार रघु की भूमिका निभाई है, वह एक प्रतिभाशाली पारंपरिक भारतीय रसोइया है और साथ ही एक दार्शनिक, गायक, संगीतकार, डांस इंस्ट्रक्टर और गणितज्ञ भी है। फिल्म मे, रघु बताता है कि उसने ये हुनर और गुण कई भारतीय हस्तियों के साथ काम करके सीखे हैं, जिनमें विधान चंद्र रॉय का नाम भी शामिल है। यहां पेश हैं बिधान चंद्र रॉय के कुछ प्रेरक, विचारणीय उद्धरण
अपनी पर्सनैलिटी को निखारें, ताकि आप जिस भी क्षेत्र में सेवा करने का मौका पाएं, वहां अपनी अलग पहचान बना सकें।
अपने समुदाय से बाहर के लोगों के साथ दोस्ती और मेलजोल बढ़ाएं, और उन्हें भी उतना ही जानें जितना आप अपने लोगों को जानते हैं। ऐसे सामाजिक मेलजोल से जो समझ और सराहना विकसित होती है, वह राज्यों के बीच के मतभेदों को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है, और इससे जीवन बेहतर और दिलचस्प बनता है।
जब कोई काम चाहे उसे आम तौर पर महत्वपूर्ण माना जाए या नहीं, मेरे हिस्से में आता है, तो मेरे लिए वह तुरंत महत्वपूर्ण हो जाता है। जब तक काम पूरा न हो जाए, मैं आराम नहीं कर सकता, देश की जो भी सेवा मैं कर पाया हूँ, वह मुख्य रूप से काम के प्रति मेरे इसी नजरिए और सोच की वजह से है।
मेरे युवा दोस्तों, आप आजादी की लड़ाई के सिपाही हैं ऐसी आजादी जो तंगी, डर, अज्ञानता, निराशा और बेबसी से मुक्ति दिलाए। देश के लिए निस्वार्थ भाव से कड़ी मेहनत करते हुए आप उम्मीद और हिम्मत के साथ आगे बढ़ें, याद रखें, इस तेजी से बदलती दुनिया में आपको आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप पीछे छूट जाएँगे।
स्वराज हमेशा एक सपना ही रहेगा जब तक कि लोग शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और मजबूत न हों। वे तब तक ऐसे नहीं हो सकते जब तक माताओं के पास बच्चों की ठीक से देखभाल करने के लिए सेहत और समझ न हो।
मैंने एक और भाषण में लोगों से खुद सोचने और यह पता लगाने के लिए कहा था कि वे अपनी मुश्किलों से कैसे निपटें। मुश्किलें हमेशा होती हैं वे हमेशा रहेंगी, और मुझे खुशी है कि मुश्किलें हैं, क्योंकि वे कल्पना और बुद्धि को जगाती हैं, और तब आप समस्या को हल करने के तरीके खोज सकते हैं।
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत की आजादी के साथ-साथ, देश के पुनर्निर्माण के लिए आम लोगों का शारीरिक और मानसिक विकास भी जरूरी है।
मैं ऐसा तभी करूँगा अगर इसमें पार्टी का कोई दखल न हो। मुझे पार्टी की सदस्यता के बजाय काबिलियत और योग्यता के आधार पर अपने मंत्री चुनने की आजादी होनी चाहिए। -डॉ. बिधान चंद्र रॉय
Adversity awakens imagination and intellect—inspiring quotes from the renowned doctor, skilled politician, and administrator Bharat Ratna Dr. Bidhan Chandra Roy

