कोई ख्वाब देख डालो, कोई इंकिलाब लाओ, दिल की खेती सूख रही है, कैसी ये बरसात हुई, मशहूर उर्दू हिंदी कवि, लेखक, बॉलीवुड गीतकार, पटकथाकार राही मासूम रजा के कथन

15 मार्च 1992 मुंबई में मशहूर उर्दू और हिंदी कवि, लेखक और बॉलीवुड गीतकार राही मासूम रजा (जन्म 1 सितंबर 1927 गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) का इंतकाल हुआ। राही मासूम रजा…

रोजमर्रा की सामान्य पीड़ा से बढ़कर कोई नई भयावहता नहीं हो सकती लोकप्रिय विचित्र, डरावनी, काल्पनिक और विज्ञान कथाओं के प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक एच. पी. लवक्राफ्ट के उद्धरण

रोजमर्रा की सामान्य पीड़ा से बढ़कर कोई नई भयावहता नहीं हो सकती लोकप्रिय विचित्र, डरावनी, काल्पनिक और विज्ञान कथाओं के प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक एच. पी. लवक्राफ्ट के उद्धरण15 मार्च 1937…

मुश्किलें इंसान को खुद से रूबरू कराती हैं, रचनात्मकता वह बुद्धिमत्ता है जो मौज-मस्ती कर रही हो -अल्बर्ट आइंस्टीन

14 मार्च 1879 उल्म, जर्मनी में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ। अल्बर्ट आइंस्टीन सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी बने, मुख्य रूप से सापेक्षता का सिद्धांत विकसित करने के लिए जाने गए। आइंस्टीन…

जेनेट मॉक- वेश्यावृत्ति से प्रसिद्ध लेखिका, समाजसुधारक, आंदोलनकारी, लोकप्रिय वैश्विक पत्रिका पीपल की संपादक तक का सफर Janet Mock Thoughts

10 मार्च 1983 होनोलूलू, हवाई, यूनाइटेड स्टेट्स में जेनेट मॉक का जन्म हुआ। जेनेट मॉक बोल्ड अमेरिकन राइटर, टेलीविजन प्रोड्यूसर और ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविस्ट और पूर्व सैक्स वर्कर हैं। उनकी…

काफिले बसते गए हिंदोस्तां बनता गया, प्रसिद्ध भारतीय प्रखर अंग्रेजी पत्रकार, संपादक, लेखक, राजनैतिक टिप्पणीकार, आउटलुक पत्रिका के संस्थापक-संपादक विनोद मेहता के उद्धरण

8 मार्च 2015 दिल्ली प्रसिद्ध भारतीय प्रखर अंग्रेजी पत्रकार, संपादक, लेखक, राजनैतिक टिप्पणीकार, आउटलुक पत्रिका के संस्थापक-संपादक, द पायनियर, द संडे ऑब्जर्वर, द इंडिपेंडेंट और द इंडियन पोस्ट के संपादक…

साथ ले निकले है सूरज की किरण पिचकारी, 18वीं सदी के शायर और नज्म के पितामह नज़ीर अकबराबादी की ग़ज़ल

हाँ इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारीदेखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारीतेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबहसाथ ले निकले है सूरज की किरण पिचकारीजिस पे हो रंग…

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