काफिले बसते गए हिंदोस्तां बनता गया, प्रसिद्ध भारतीय प्रखर अंग्रेजी पत्रकार, संपादक, लेखक, राजनैतिक टिप्पणीकार, आउटलुक पत्रिका के संस्थापक-संपादक विनोद मेहता के उद्धरण

8 मार्च 2015 दिल्ली प्रसिद्ध भारतीय प्रखर अंग्रेजी पत्रकार, संपादक, लेखक, राजनैतिक टिप्पणीकार, आउटलुक पत्रिका के संस्थापक-संपादक, द पायनियर, द संडे ऑब्जर्वर, द इंडिपेंडेंट और द इंडियन पोस्ट के संपादक…

साथ ले निकले है सूरज की किरण पिचकारी, 18वीं सदी के शायर और नज्म के पितामह नज़ीर अकबराबादी की ग़ज़ल

हाँ इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारीदेखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारीतेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबहसाथ ले निकले है सूरज की किरण पिचकारीजिस पे हो रंग…

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